Tuesday, February 27, 2024
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भारत में सूचना और दूरसंचार प्रौद्योगिकी

भारत एक विशाल देश है जिसमें 100 करोड़ से भी अधिक लाग रहते हैं। जनसंख्या में विश्व में चीन के बाद भारत का दूसरा स्थान है। सन् 1947 के बाद देश में सूचना प्रौद्योगिकी और दूरसंचार के क्षेत्र में क्रान्ति आ गई है।

जन-जन की भाषा में सूचना प्रौद्योगिकी में वे सारे प्रक्रम आते हैं जिनमें कम्प्यूटर प्रयोग होता है और दूरसंचार प्रणालियों में कम्प्यूटर अधिक प्रयोग नहीं होता।
सूचना प्रौद्योगिकी में इंटरनेट, ई-मेल, मल्टीमीडिया, डाटाबेस, उपग्रहों द्वारा सूचना प्रौद्योगिकी, प्रकाशीय और लेसर प्रौद्योगिकी, टेलीटेक्स्ट, वीडियोटेक्स्ट और कान्फ्रेन्सेज आदि आते हैं और संचार प्रौद्योगिकी में टेलीग्राफ, टेलीप्रिन्टर, टेलेक्स, फैक्स, टेलीफोन, रेडियो, टेलीविजन आदि आते हैं।

भारत में सूचना और दूरसंचार प्रौद्योगिकी

भारत में सूचना और दूरसंचार प्रौद्योगिकी
भारत में आजादी के बाद सूचना और संचार प्रौद्योगिकियों में होने वाली उपलब्धियों के विषय में इस अध्याय में जानकारी दी गई है। स्वतंत्रता के समय देश में लगभग 20,000 डाकघर थे लेकिन आज इनकी संख्या 2 लाख के करीब पहुँच गई है। देश में 60 हजार के लगभग तारघर हैं जो देश के लोगों की सेवा कर रहे हैं। देश में लगभग 250 शहरों में टेलेक्स सुविधाएँ हैं जो देश में और विदेश में व्यापार संस्थानों और मौसम केन्द्रों को जोड़े हुए
देश के अनेक सरकारी कार्यालय, निजी कार्यालय, समाचार पत्र कार्यालय फैक्स सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं। फैक्स मशीनों ने व्यापार संस्थानों और प्रयोगकर्त्ताओं को एक-दूसरे से जोड़ दिया है। सन् के आँकड़ों के अनुसार देश में 40,000 टेलीग्राफ ऑफिस कार्यरत थे।
सन् 1983-84 में इनसे 7,69,00,000 तार भेजे तब अब तक देश में रोजाना तारघर खोले गये हैं जिनकी संख्या अब करीब 80,000 हो गई है।
पिछले 50 सालों में टेलीप्रिन्टरों और टेलेक्सों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है। आज 200 से भी अधिक शहर टेलेक्स पर देश और विदेश के लिए तार बुक कर सकते हैं। आज देश में इलेक्ट्रॉनिक्स टेलेक्स सुविधा भी प्राप्त है।
पूर्णरूपेण स्वचालित टेलेक्स सुविधा गेटेक्स, मुम्बई, दिल्ली और मद्रास आदि क्षेत्रों में प्राप्त है। इस सुविधा ने 200 से अधिक देशों को जोड़ दिया है। लगभग 500 बेतार के तार केन्द्र देश में कार्य कर रहे हैं।
देश में बहुत •सी कम्पनियाँ टेलीफोन उपकरण और एक्सचेन्ज बना रही हैं। हर वर्ष देश में 7 लाख के लगभग टेलीफोन उपकरण बनाए जाते हैं। देश में पुश बटन टेलीफोन उपकरण भी बनाए जा रहे हैं। बंगलौर में सन् 1980 में एक नए प्रकार का टेलीफोन डायल बनाया गया।
स्वतंत्रता के समय में देश में 86000 टेलीफोन थे। आज देश में 70 लाख से भी अधिक टेलीफोन हैं और 30 हजार से भी अधिक टेलीफोन एक्सचेन्ज हैं। इनमें अधिकतर इलेक्ट्रॉनिक एक्सचेन्ज हैं। इन एक्सचेंजों से 400 से भी अधिक शहर, 3000 कस्बे और 10,000 गाँव जुड़े हुए हैं। जगह-जगह शहरों में एस. टी. डी. और आई. एस. डी. के बूथ बने हुए हैं जिनसे देश के 400 से अधिक शहर जुड़े हुए हैं। 250 से अधिक एस. टी. डी. एक्सचेन्ज देश में हैं।
आज 70 देशों से भी अधिक देशों के साथ सीधी टेलीविजन सुविधाएँ उपलब्ध हैं। इनमें से 50 के लगभग राष्ट्र संचार उपग्रहों से जुड़े हुए हैं। आज हमारी सुविधाओं से 200 से अधिक देश आई. एस. डी. द्वारा जुड़े हुए हैं। आज 35000 अन्तर नगरीय टेलीफोन एक्सचेन्ज सुविधाएँ उपलब्ध हैं। ये टेलीफोन उच्च आवृत्ति वाली सूक्ष्म तरंगों से जुड़े हैं।
आज दिल्ली और मुम्बई ही नहीं बल्कि देश के बहुत से शहरों में लोग सेलुलर फोनों को प्रयोग कर रहे हैं। इन फोनों से हम चलती बसों, कारों और रेलगाड़ियों से कहीं भी फोन कर सकते हैं। वह दिन दूर नहीं जब शहर, नगर और सभी गाँव एक-दूसरे से टेलीफोन सुविधाओं से जुड़ सकेंगे और लोग देश-विदेश में कहीं भी फोन कर सकेंगे।
हमारे देश में सन् 1996 में रेडियो सेवाएँ शुरू हुई। आज देश के 95% लोग आकाशवाणी के कार्यक्रम सुन सकते हैं। देश में 100 से भी अधिक रेडियो केन्द्र हैं और 200 के लगभग ट्रान्समीटर हैं। देश का लगभग 80% क्षेत्रफल रेडियो द्वारा कवर होता है।
हमारा देश रेडियो संचार उपग्रहों द्वारा प्रसारण करने में भी सक्षम है। देश में रेडियो के कार्यक्रमों में आयाम और आवृत्ति दोनों ही प्रकार के मौडूलन प्रयोग हो रहे हैं। रेडियो की उपयोगिता केवल रेडियो केन्द्रों से प्रसारण के लिए ही नहीं बल्कि पुलिस और दूसरे दिभागों के लिए भी है।
हमारे देश में टेलीविजन प्रसारण सेवा का आरम्भ 15 सितम्बर, 1959 को हुआ था। यह आरंभ दिल्ली में हुआ था। आज 50 वर्षों में टी. वी. कार्यक्रम देश के कोने-कोने में जा पहुंचे हैं। देश में श्याम श्वेत और रंगीन कार्यक्रम दोनों ही आप अपने टी. वी. पर देख सकते हैं। आज देश में 220 के लगभग दूरदर्शन ट्रान्समीटर हैं।
अब लोगों के पास अधिकांश रंगीन टेलीविजन हैं। हमारा टेलीविजन अनेक कृत्रिम उपग्रहों से जुड़ा हुआ है। देश के अपने भी संचार उपग्रह हैं। हमारे देश का आर्यमट्ट उपग्रह 19 अप्रैल, 1973 को छोड़ा गया। यह उपग्रह चित्र 14.1 में दिखाया गया है।
उपग्रहों द्वारा किसी भी देश में होने वाले खेलों का हाल हम अपने टी. वी. पर देख सकते हैं। आज के टी. वी. पर अनेक मल्टीमीडिया के एनीमेशन कार्यक्रम भी देखने को मिलते हैं।
10 अप्रैल, सन् 1982 को भारत ने इनसेट-1B अपना संचार उपग्रह छोड़ा। इससे लम्बे समय तक हम अपने रेडियो और टी. वी. कार्यक्रम देखते रहे। यह सब रूस के सहयोग से किया गया। संचार के उपग्रहों की सहायता से म्यूनिख में हुए ओलम्पिक खेलों को अपने-अपने टी. वी. सेटों पर 100 करोड़ से अधिक लोगों ने देखा। इनसेट-1B के बाद में भारत अपने कई संचार उपग्रह छोड़ चुका है।
मेम्बरों को रेडियो पेजिन्ग सुविधा का भी लाभ है। इसके द्वारा कनाट •प्लेस के 20 किलोमीटर दूरी तक रेडियो पेजिन्ग द्वारा एक ओर की संचार सुविधा उपलब्ध है। चित्र 14.2 में रेडियो पेजिन्ग का सिद्धान्त दिखाया गया है। इससे सावधान होने की सूचना मिल जाती है। पेजर पॉकेट आकार का रेडियो रिसीवर होता है। जब सब्सक्राइबर को कोई पेजर संदेश मिलता है तो वह जाने हुए नम्बर पर कॉलर को सम्पर्क करेगा। यह सुविधा डॉक्टरों के लिए बहुत ही उपयोगी है।
देश में इन्टरकॉम फोनों का निर्माण हो रहा है। इनका सरकारी दस्त और निजी दफ्तरों में आन्तरिक संचार के लिए बहुत उपयोग है। देश में 20 से 30 लाइनों के इन्टरकॉम बन रहे हैं।
मुम्बई, कलकत्ता और मद्रास में शिषशोर सेवा 800 किलोमीटर दूर पर चलने वाले जलयानों के लिए रेडियो सुविधायें उपलब्ध हैं। ये सेवाएँ अन्तर्राष्ट्रीय ट्रन्क कॉल के रूप में उपलब्ध हैं।
भारत बंगलादेश, भूटान, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका से सीधा ही टेलीफोन द्वारा जुड़ा हुआ है।
कम्प्यूटरों का प्रयोग दिन-प्रतिदिन देश में बढ़ता जा रहा है। भारत ने नया डिजिटल स्विच विकसित किया है। इस स्विच का विकास सी-डोट ने किया था। यह विकास 15 अगस्त, सन् 1984 को सैम पेट्रोडा के प्रयासों का परिणाम था। सी-डोट ने संचार व्यवस्थाओं में काफी उन्नति की है। सी-डोट संचार व्यवस्थाओं में नये परिवर्तन लाया है।

Teletext से लाभान्वित हो रहे लोग

टेलीटेक्स्ट सेवाएँ कुछ समाचार-पत्रों द्वारा प्रयोग की जा रही हैं। टेलीटेक्स्ट सुविधा द्वारा हिन्दू समाचार-पत्र मद्रास में बनता है तो गुड़गाँवा में छपता है। देश में वीडियोटेक्स्ट सुविधा भी शुरू हो गई है। इनसेट प्रणाली द्वारा संचार विभाग ने रिमोट बिजनेस मैसेज नेटवर्क प्राप्त कर लिया है। इसमें टेलेक्स, फैक्स, इलेक्ट्रॉनिक मेल आदि आते हैं।
सन् 1989 में डाटा संचार व्यवस्था आरंभ हो गई थी। दूरसंचार सुविधाएँ उच्च स्तर पर ग्रामीण क्षेत्रों में फैलाई जा रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के लिए टोटे टेलीफोन एक्सचेन्ज बनाए जा रहे हैं। भारत का दूरसंचार विभाग देश के उत्तरी-पूर्वी क्षेत्र में टेलीग्राफ केन्द्र लगाने का प्रयास कर रहा है जो उपग्रहों द्वारा चलाए जाएँगे।
सुविधाएँ हमारे देश की सरकार सभी गाँवों को रेडियो और टेलीविजन देने की योजना बना रही है। इससे हमारे रहन-सहन का स्टैन्डर्ड पता लगेगा।
आई.एस.डी.एन. दूरसंचार प्रणालियों में नई तकनीक होगी। आई. एस. डी. एन. सुविधा द्वारा आवाज, टेक्स्ट, ऑकड़ों या चित्रों को दूरियों तक भेजा जा सकेगा। आई. एस. डी. एन. के एक्सचेन्ज सारी दुनिया में लगाए जा रहे हैं। आज बेल्जियम, जर्मनी, डेनमार्क, फिनलैण्ड, फ्रान्स, यू. के., इटली, जापान, ऑस्ट्रिया, स्वीडन, स्विट्जरलैण्ड, स्पेन, अमेरिका आदि  देश आई. एस. डी. एन. तकनीकी पर आधारित फोन एनालॉग और डिजिटल दोनों ही हो सकते हैं।
इसके द्वारा टेलीटेक्स्ट और वीडियोटेक्स्ट दोनों ही संचरित हो सकते हैं। आज हमारे देश के लगभग सभी कम्प्यूटरों पर इंटरनेट सुविधाएँ उपलब्ध । हम अपने कम्प्यूटर से कहीं पर भी इन्टरनेट सम्बन्ध कर सकते हैं। इन्टरनेट द्वारा हमारा क्षणभर में सन्देश पहुँच जाता है।

सूचनाओ के आदान प्रदान में हुई है तेजी

भारत में जब से इन्टरनेट प्रणाली आई है तब से सूचनाओं के आदान-प्रदान में बड़ी उन्नति हुई है। इन्टरनेट पर व्यापार, शिक्षा तथा अनुसन्धान संदेशों के आदान-प्रदान में बड़ी तीव्रता आई है। इंटरनेट पर आज चैट की सुविधायें उपलब्ध हैं। हम विदेश में रहने वाले अपने मित्रों से चैट कर सकते हैं। हमारे देश की लगभग 12 प्रमुख वेबसाइट्स हैं जिनका विवरण अध्याय-2 में दिया गया है।
आज हम अपने कम्प्यूटर से कहीं पर भी ई-मेल भेज सकते हैं और प्राप्त कर सकते हैं। ई-मेल भेजने और प्राप्त करने में देश में क्रान्ति आ गई है। ई-मेल द्वारा कोई भी सूचना हम कहीं पर भी भेज सकते हैं। हमारे देश में मल्टीमीडिया के अनेक कार्यक्रम अपने टी. वी. पर देखने को मिलते हैं। एनीमेशन कार्यक्रम बच्चों को टी. वी. पर बहुत पसन्द आते हैं। देश में अनेक डाटाबेस केन्द्र हैं। इनसे कोई भी सूचना प्राप्त की जा सकती है।

छा जायेंगे चारो ओंर कंप्यूटर

कम्प्यूटरों के उपयोगों ने देश में तहलका मचा दिया है। आज सभी सरकारी विभाग, व्यापारिक संस्थान, विश्वविद्यालय, कॉलेज, निजी संस्थान कम्प्यूटरों का अनेक कार्यों के लिए प्रयोग कर रहे हैं।
वह दिन दूर नहीं जब कम्प्यूटर आज से भी अधिक देश में छा जाएँगे। पिछले 20 वर्षों में कम्प्यूटरों के प्रयोग ने देश में तहलका मचा दिया है। इस सदी में देश की तस्वीर दिन-प्रतिदिन बदल रही है। सुपर कम्प्यूटर (चित्र 14.3) हमारे मौसम विभाग द्वारा प्रयोग हो रहे हैं।
देश में दूरसंचार साधनों का विकास बड़ी तीव्रता से हुआ है। हमारा सपना है कि हम विश्व में किसी से पीछे न रहें। इस सपने को साकार करने के लिए देश के सभी प्रबुद्ध नागरिक भरसक प्रयास कर रहे हैं।
आज अति आधुनिक सुविधाएँ जैसे कम्प्यूटर, इंटरनेट ई-मेल, टेलीटेक्स्ट, वीडियोटेक्स्ट, टेली कान्फ्रेन्सिंग आदि हमारे पास हैं। देश के अधिकांश महानगर, नगर और गाँव सूचना और संचार साधनों से एक-दूसरे से जुड़ गए हैं। वह दिन दूर नहीं जब हम संचार और सूचना साधनों द्वारा एक दूसरे के और भी पास आ जाएँगे।
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